दोहा : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच वॉशिंगटन ने पश्चिम एशिया में अपनी तैनाती को लेकर बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने कतर स्थित अपने प्रमुख सैन्य अड्डे अल उदेद एयर बेस से कुछ अहम सैन्य विमानों को हटाना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना के KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमानों को कतर से इस्राईल के दक्षिणी हिस्से में स्थित ओवदा एयर बेस भेजा जा रहा है। ये विमान सीधे लड़ाई नहीं लड़ते, बल्कि हवा में ही फाइटर जेट और बॉम्बर विमानों को ईंधन उपलब्ध कराते हैं, जिससे वे लंबी दूरी के मिशन को अंजाम दे सकें।
हालांकि सतह पर यह कदम अमेरिकी सेना की पीछे हटने जैसी तस्वीर दिखा सकता है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञ इसे एक रणनीतिक पुनर्स्थापन मान रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ने के बाद अमेरिका अपने महत्वपूर्ण संसाधनों को सुरक्षित और अधिक प्रभावी स्थानों पर तैनात कर रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने अल उदेद एयर बेस से अपने विमानों को हटाया हो। इस साल दूसरी बार ऐसा कदम उठाया गया है, जिससे संकेत मिलते हैं कि अमेरिका अपने प्रमुख सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्क हो गया है।
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जुलाई के मध्य से अल उदेद एयर बेस से कई KC-135 विमानों ने उड़ान भरी है। इनमें से कई विमानों के इस्राईल पहुंचने की बात कही जा रही है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में तैनात 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर हैं। क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर संभावित हमलों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
KC-135 जैसे टैंकर विमान अमेरिकी सैन्य अभियानों में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। इनके जरिए लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ती है और वे ज्यादा समय तक हवा में रहकर मिशन पूरा कर सकते हैं।
फिलहाल अमेरिका का यह कदम युद्ध से पीछे हटने के बजाय अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जहां वह अपने संसाधनों को खतरे वाले क्षेत्रों से निकालकर अधिक सुरक्षित और उपयोगी स्थानों पर तैनात कर रहा है।
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